छठ पर तालाबों की करें सफाई: धार्मिक न्यास बोर्ड की मठ-मंदिरों से अपील।

पटना। द न्यूज़।बिहार में दीपावली के उल्लास और लोकआस्था के महापर्व छठ की पवित्रता को अब एक नई सामाजिक क्रांति से जोड़ा जा रहा है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन ने राज्य के 4,500 से अधिक पंजीकृत मठ-मंदिरों से एक ऐतिहासिक अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों का दायित्व केवल अनुष्ठान और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक त्योहार की खुशियां पहुंचाना उनका सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य है। इसलिए सभी से अपील है कि राज्य के मंदिर दिवाली पर गरीबों के बीच मिठाई बांटें और छठ महापर्व के लिए स्थानीय तालाबों व जलाशयों की सफाई का मोर्चा संभालें। इसमें संबंधित सभी को पत्र भेजा जा रहा है।दीपावली को सही मायनों में प्रकाश पर्व बनाने के लिए न्यास बोर्ड ने मंदिरों से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का जोरदार आह्वान किया है। प्रो. नंदन ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके को भी बिना किसी अभाव के त्योहार मनाने का अधिकार है। यदि राज्य के हजारों मठ-मंदिर अपने-अपने क्षेत्र के गरीब और वंचित परिवारों की जिम्मेदारी ले लें और उनके बीच मिठाई तथा जरूरी सामग्रियों का वितरण करें, तो लाखों घरों की दिवाली रोशन हो सकती है। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि उत्सव एक वृहद सामाजिक समरसता का रूप ले।

दीपावली के तत्काल बाद शुरू होने वाले छठ महापर्व के लिए भी न्यास पर्षद ने एक दूरगामी कार्ययोजना पेश की है। प्रो. नंदन ने इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया कि छठ प्रत्यक्ष देवता सूर्य भगवान का व्रत है और आज यह पर्व अनेकों देशों में मनाया जा रहा है। आम जनमानस की यह गहरी धारणा है कि इस व्रत में आर्थिक एवं शारीरिक योगदान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसीलिए लोग अपने घर से लेकर बाहर तक, साफ-सफाई से लेकर फल वितरण तक के कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग देते हैं।इसी अगाध जन-आस्था को आधार बनाते हुए उन्होंने मठ एवं मंदिरों के सम्मानित महंतों एवं न्यास समितियों से अपील की है कि वे अभी से इतनी पुख्ता योजना बनाएं, जिससे इस महापर्व में आम परिवार और आम जनता को अधिकतम सहूलियत हो सके। बिहार में 2.8 लाख से अधिक छोटे-बड़े जल निकाय, तालाब और पोखर हैं, जहां करोड़ों छठ व्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं। ऐसे में मंदिरों के नेतृत्व में स्थानीय स्वयंसेवकों और जन-समर्थन के साथ घाटों की सफाई का यह अभियान एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो सकता है।धार्मिक संस्थानों को समाज कल्याण के मुख्य ध्रुव के रूप में स्थापित करने की यह पहल बिहार के लिए मील का पत्थर साबित होगा। प्रो. नंदन ने कहा,कि सच्ची आराधना मानव सेवा और सामाजिक समानता में निहित है। मठ-मंदिरों की यह सक्रिय जन-भागीदारी राज्य में दिवाली और छठ को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक उल्लास का सबसे बड़ा प्रतीक बना देगी।