रक्षाबंधन: सदियों पुरानी परंपरा से डिजिटल युग तक का सफर

पटना। द न्यूज़।( सची श्यामली )। राखी का धागा केवल सजावट या रंग-बिरंगे तत्वों (धागा और मोती) का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसका गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व है। राखी बांधते समय बहन अपने भाई से प्रेम, सुरक्षा और सहयोग की भावना की अपेक्षा करती है। इसके बदले भाई अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने और उसका साथ निभाने का वचन देता है। यह आदान-प्रदान एक-दूसरे के प्रति प्रेम, विश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है और इसे सदियों से मनाया जाता रहा है। यह त्योहार परिवार में प्रेम, एकता और आपसी जुड़ाव के मूल्यों को दर्शाता है। भले ही भाई-बहन भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर रहते हों, लेकिन इस दिन वे एक-दूसरे से जुड़ने और इस रिश्ते को मजबूत करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार रक्षाबंधन पारिवारिक संबंधों को और अधिक मजबूत करता है।


परंपरागत रूप से रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित पर्व है, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप व्यापक हुआ है। आज इसे केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं माना जाता। यह पर्व चचेरे-ममेरे भाई-बहनों, मित्रों और उन लोगों के बीच भी मनाया जाता है, जो एक-दूसरे को भाई या बहन के समान मानते हैं। इस प्रकार रक्षाबंधन रिश्तों में प्रेम, विश्वास और सद्भावना की भावना को बढ़ावा देता है।
आज रक्षाबंधन धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से आगे बढ़कर एकता और भाईचारे का प्रतीक बन गया है। यह हमारे भारतीय सांस्कृतिक आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से भी जुड़ता है, जिसका अर्थ है—“पूरा विश्व एक परिवार है।” इसी भावना के अनुरूप रक्षाबंधन समुदाय के विभिन्न लोगों को प्रेम, सुरक्षा और आपसी सहयोग के सूत्र में बांधने का संदेश देता है।
“रक्षाबंधन” शब्द का अर्थ ही है—“रक्षा का बंधन”। यह पर्व आमतौर पर हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026 को दोपहर में होगा और इसका अंत 28 अगस्त को दोपहर में होगा | शास्त्रों में रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त और भद्रा रहित काल में रक्षा सूत्र बंधना शुभ होता है इस साल भद्रा काल 27 अगस्त को सुबह 9:08 से रात 9:32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा इस कारण 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 से लेकर सुबह 9:49 मिनट तक रहेगा | दूसरी शुभ समय अभिजीत मुहूर्त व शुभ दोपहर 12:28 से 02:03 बजे तक उत्तम एवं मंगलकारी समय है अगर सुबह नहीं राखी नहीं बांध पा रहे तो चर तीसरा संध्याकाल शाम 05:12 से 06:43 बजे तक रखी बांध सकते है |

परंपराएं और वर्चुअल रखी का दौर
बदलते वक़्त के साथ रखी का त्योहार बदलता जा रहा है डिजिटल युग में जो भाई बहन दूर रहते है वो ऑनलाइन रखी भेजते हैं वीडियो कॉल पर तिलक और मिठाई का आदान-प्रदान होता है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इन्टरनेट ने इस प्यार भरे त्योहार को और भी बड़ा बना दिया है |इस दिन भाई-बहन राखी बांधने, मिठाई खिलाने और एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम एवं स्नेह को व्यक्त करने की परंपरा निभाते हैं।
कुल मिलाकर, रक्षाबंधन एक हृदयस्पर्शी पर्व है, जो रिश्तों के महत्व को रेखांकित करता है। विशेष रूप से यह भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है तथा समाज में प्रेम, देखभाल, सहयोग, एकता और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है।