इस दो हजार वर्ष पुराने शिवलिंग का अद्भुत महत्व

पटना। द न्यूज़। बिहार राज्य धार्मिक न्यास के अध्यक्ष रणबीर नंदन ने तिरुपति स्थित दो हजार वर्ष पुराने शिवलिंग का पूजन किया। आंध्रप्रदेश के तिरुपति जिले स्थित प्रसिद्ध कालहस्ती तीर्थ जहां भगवान शिव वायुलिंग के रूप में विराजमान हैं वहां पहुंचकर उन्होंने दर्शन,पूजन किया । उन्होंने कहा कि लगभग 2000 वर्ष पुराने इस शिवलिंग का दर्शन ही भाग्यस्वरूप प्राप्त हुआ।आंध्र प्रदेश के स्वर्णरेखा नदी के किनारे स्थित श्री कालहस्ती मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है, जो भगवान शिव के वायु तत्व (पंचभूत स्थल) का प्रतिनिधित्व करता है।पौराणिक कथा और नामकरणश्री, काल और हस्ती: इस मंदिर का नाम तीन मुख्य भक्तों—’श्री’ (मकड़ी), ‘काल’ (सांप) और ‘हस्ती’ (हाथी)—के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यहाँ भगवान शिव की आराधना करके मोक्ष प्राप्त किया था।कन्नप्पा की भक्ति: मंदिर के गर्भगृह में भक्त कन्नप्पा (कर्णव भील) की मूर्ति है, जिन्होंने अपनी अटूट भक्ति दिखाते हुए अपने नेत्र भगवान शिव को अर्पित कर दिए थे।राहु-केतु दोष निवारण: यह मंदिर राहु-केतु पूजा और काल सर्प दोष मुक्ति के लिए देश-विदेश में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।