चतुर्मुखी महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक, धार्मिक न्यास पर्षद अध्यक्ष ने मंदिर ।विकास को लेकर दिए सुझाव
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन ने वैशाली जिले के बनिया ग्राम स्थित प्राचीन चतुर्मुखी महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपनी पत्नी नम्रता के साथ गोमेद पत्थर से बने इस दुर्लभ शिवलिंग का विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया। इस धार्मिक आयोजन के दौरान उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार और सामाजिक विकास को लेकर एक बड़ी घोषणा की। प्रो. नंदन ने बताया कि अब दक्षिण भारत के मंदिरों की तर्ज पर बिहार के इस प्राचीन शिव मंदिर परिसर में भी जल्द ही स्कूल खोले जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य धर्म के साथ-साथ समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाना है।
यह चतुर्मुखी महादेव मंदिर अपने आप में बेहद खास और चमत्कारी माना जाता है। यहां स्थापित शिवलिंग दुर्लभ गोमेद पत्थर से निर्मित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस गोमेद शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करने से राहु, केतु और शनि जैसे क्रूर ग्रहों की शांति होती है। खुद प्रो. रणबीर नंदन ने बताया कि उनकी राहु की महादशा चल रही थी। इसी वजह से उनके मन में इस विशेष शिवलिंग के दर्शन की तीव्र इच्छा जाग्रत हुई। स्थानीय लोगों में यह गहरी आस्था है कि यह शिवलिंग संतान प्रदाता है। यहां सच्चे मन से मांगी गई संतान प्राप्ति की मन्नत जरूर पूरी होती है। इसी प्राचीन महत्व को देखते हुए न्यास बोर्ड ने इस मंदिर के भव्य विकास का खाका तैयार किया है।
मंदिर के विकास के लिए धार्मिक न्यास पर्षद ने एक विशेष रणनीति बनाई है। प्रो. नंदन ने बताया कि इस मंदिर के पास करीब एक एकड़ जमीन उपलब्ध है। उन्होंने मंदिर समिति को प्रस्ताव दिया है कि इस खाली जमीन पर एक प्राइमरी स्कूल का निर्माण कराया जाए। इसके अलावा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के ठहरने के लिए दस से पंद्रह कमरों का एक विश्राम गृह भी बनाया जाएगा। न्यास पर्षद ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से मंदिर की बाउंड्री वॉल बनाने का भी सख्त निर्देश दिया है। इसके लिए तत्काल प्रभाव से कुछ राशि भी स्वीकृत कर दी गई है। सरकार और न्यास बोर्ड का स्पष्ट मानना है कि मंदिर सिर्फ पूजा के केंद्र न रहें, बल्कि वे शिक्षा और समाज सेवा के भी बड़े माध्यम बनें।
इस नई योजना के पीछे दक्षिण भारत के बड़े और संपन्न मंदिरों का सफल मॉडल है। वहां के अधिकांश बड़े मंदिर अपने स्तर से यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज चलाते हैं। इसी तर्ज पर बिहार में भी मठ-मंदिरों की खाली पड़ी जमीनों का उपयोग शिक्षा के लिए किया जाएगा। प्रो. नंदन ने अपने संबोधन में बताया कि जो भी मंदिर या धर्मशाला अपने परिसर में स्कूल खोलना चाहेंगे, उन्हें सरकार की तरफ से पूरी सहायता मिलेगी। यह अहम कदम समाज को शिक्षित और सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रो. नंदन ने सावन माह और चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मार्कंडेय ऋषि की कथा सुनाते हुए शिव की महिमा का वर्णन किया और बताया कि कैसे महादेव ने ऋषि की रक्षा की थी। देवशयनी एकादशी के बाद जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब सृष्टि के संचालन का पूरा प्रभार भगवान शिव के पास होता है। इसीलिए इन चार महीनों में शिव आराधना का विशेष फल मिलता है। इसी गहरी आस्था और विश्वास के साथ चतुर्मुखी महादेव मंदिर में श्री नंदी जी की स्थापना भी की गई। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में अंजनी सुधाकर ने भी अहम भूमिका निभाई। अब यह प्राचीन मंदिर शिक्षा, विकास और आस्था का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।