मन को आकार देने वाले शिक्षक, जीवन को दिशा देने वाले गुरु। शिक्षक दिवस पर रिपोर्ट

पटना। द न्यूज़।पढ़ना दुनिया का सबसे प्रभावशील कार्य है | एक शिक्षक, एक मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक होते हैं ये हम सब जानते हैं शिक्षक की भूमिका कितनी मह्त्वपूर्ण होती हैं ये हमारे मन को आकार देते और संस्कार के बीज बोते है और जो एक इंसान को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं भारत में शिक्षक दिवस का दिन पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को समर्पित है वे राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक बेह्तरीन शिक्षक, विद्वान और प्रसिद्धि दार्शनिक थे |
शिक्षक दिवस शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करने और उनमें अच्छे संस्कार एवं मूल्यों का निर्माण करने में शिक्षक योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन हम सब विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति आभार और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर मिलता है।भारत में शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा 1965 में शुरू हुई, जब भारत सरकार ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के रूप में मनाने के बजाय शिक्षकों को समर्पित दिवस के रूप में मनाया जाए।

मेरे जीवन में शिक्षक और गुरु का प्रभाव और अनुभव |
मेरा नाम शचि श्यामली सिंह है मैं बहुत छोटे से ही पत्रकारिता की पढ़ाई करना चाहती थी जब कक्षा हम दोस्त आपस मे भविष्य में क्या प्रफेशन चुनेंगे की बात करते तो 99% डॉक्टर और इंजीनियर बनना चुनते मैंने कभी कुछ नहीं क्युकि मेरी ना तो विज्ञान अच्छी थी और ना ही अंग्रेजी अच्छी थी तोड़ी बहुत गणित और हिंदी सही थी, तब भी आगे चल कर पत्रकारिता की पढ़ाई करूंगी मन में था ये मैंने साझा नहीं किया दोस्तों के साथ | मैं गाँव में संयुक्त परिवार में ही रहती थी, जब मेरे पिता गाँव मढ़ौरा से दूर हाजीपुर आए जीविका चलाने के लिए, वहां मेरी नए स्कूल (इंडियन पब्लिक स्कूल) में एडमिशन हुआ और मुझे अपने जीवन क्या प्रोफेसर चुनाव करना है ये स्पष्ट हो गया क्युकि उस स्कूल के दो टीचर का मेरे मन पे काफी प्रभाव होता था जियोर्गाफी टीचर सुष्मिता मैम और सोशल साइंस टीचर अरचिता लाल मैम, वो हमेशा क्लास ये बात करती की आगे चलकर क्या करना है स्कूल के बाद कॉलेज में कैसी पढ़ाई होती हैं, हमारे देश में सभ्यता-संस्कृति के विषय उनके उनके माता-पिता के साथ कैसी समझ है और सुष्मिता मैम पढ़ाई प्रफेशन के साथ मेडिटेशन करने की बात करती थी और हम जिस ब्रम्हांड रहते है वो कैसा है, बिहार कितना सुन्दर है, हमारा धरती कितना सुन्दर है और वास्तव ये कैसे काम करती और कैसी दिखती है ये तुम लोगों देखना चाहिए, जब आप लोग बारे होना तो अपने पृथ्वी और बिहार को तो जरूर ही देखना तभी मन को एक उड़ान मिली और सबसे महत्वपूर्ण मेरे गुरु (श्री जग्गी वासुदेव) जिनसे मैंने ध्यान की दीक्षा ली जिन्होंने हमरी इच्छा पूरे ना होने के अलावा उसके आगे भी जीवन है को बताया और दिखाया | मैं इन सब गुरु के प्रति कृतज्ञ हूँ, मेरे अन्दर इनलोगों से मिली शिक्षा और ज्ञान के लिए मेरे हृदय में हमेशा प्रेम और धन्यवाद रहता है | आज टीचर डे है तो मेरे जीवन पे टीचर और गुरु क्या प्रभाव हुआ है ये अनुभव साझा करना सही लगा |हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारत के राष्ट्रपति द्वारा 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।शिक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश के उत्कृष्ट शिक्षकों के विशिष्ट योगदान को सम्मानित करना है। यह पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपनी प्रतिबद्धता और मेहनत के माध्यम से न केवल स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया, बल्कि अपने विद्यार्थियों के जीवन को भी समृद्ध बनाया है।
इस वर्ष कुल 48 स्कूली शिक्षकों का चयन शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा तीन चरणों की चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। यह प्रक्रिया जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पूरी की गई। चयनित शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के, 6 संगठनों से हैं। कुल 48 चयनित शिक्षकों में 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक शामिल हैं।

(शचि श्यामली सिंह की रिपोर्ट। पांच सितम्बर शिक्षक दिवस पर )