नीतीश की माने तो बिहार सरकार ने कोरोना से बचाव व इलाज पर अबतक 10 हजार करोड़ खर्च कर दिए

पटना।द न्यूज़। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना से बचाव व इलाज पर राज्य सरकार द्वारा 10 हजार करोड़ रूपये से भी ज्यादा खर्च किये गये। उन्होंने आज अधिवेशन भवन में स्वास्थ्य विभाग की 2,705.35 करोड़ रुपए की 989 परियोजनाओं का रिमोट के माध्यम से शिलान्यास, कार्यारम्भ, उद्घाटन एवं लोकार्पण किया। इसमें 1,503.06 करोड़ रूपये की 872 योजनाओं का शिलान्यास, 521.74 करोड़ रुपए की लागत की दो योजनाओं का कार्यारंभ, 399 करोड़ रूपये की 108 योजनाओं का उद्घाटन किया गया तथा 281.55 करोड़ रुपए की 7 योजनाओं का लोकार्पण शामिल है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम के लिये विशेष तौर पर स्वास्थ्य विभाग को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि हमने वर्ष 2006 के फरवरी माह में सर्वे कराया था जिसमें पता चला कि एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज के लिए महीने भर में 39 मरीज जाते थे। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया गया, चिकित्सकों के साथ-साथ दवा की व्यवस्था की गई और अब औसतन एक महीने में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज के लिए 10 हजार लोग पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले मरीज इलाज के लिए चिंतित रहते थे, इसको लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत काम किये गये हंै।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी इच्छा थी कि सभी जगहों पर चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध रहे। इसको लेकर आज बड़ी संख्या में कई योजनाओं की शुरूआत की गयी है। पहले बिहार के लोगों को इलाज के लिये बाहर जाना पड़ता था। एक बार हमलोगों ने सर्वेक्षण कराया तो पता चला कि खाने से ज्यादा लोगों का दवा पर खर्च होता था। तब हमलोगों ने निर्णय लिया कि अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ दवा की उपलब्धता कराएंगे और लोगों को मुफ्त दवा की व्यवस्था करायी गई। पहले की स्थिति और आज की स्थिति में कितना परिवर्तन हुआ है यह किसी से छुपी हुई नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति और उसमें अब क्या-क्या प्रगति हुयी है इसके बारे में सोशल मीडिया पर लोगों को जानकारी दें ताकि लोगों को पता चले कि पहले क्या था और अभी क्या है। मुझे खुशी है कि आज के कार्यक्रम में एक-एक चीज के बारे में जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों में भोजन उपलब्ध कराने के लिये दीदी की रसोई कार्यक्रम की शुरूआत की गयी। कई प्रकार के काम से महिलाओं को जोड़ा गया। दीदी की रसोई के माध्यम से अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। टेलिमेडिसिन के माध्यम से चिकित्सा उपलब्ध कराने के क्षेत्र में काम शुरू किया गया। अनुपयोगी उपकरण को अस्पतालों से हटाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाल हृदय शल्य योजना के बारे में भी जानकारी दी गयी। जिसके हृदय में छेद है वैसे बच्चे बच्चियों के इलाज का काम हमलोगों ने शुरू किया, यह कितनी अच्छी बात है। कल ही जनता दरबार में इस तरह का मामला आया तो तत्काल हमने बात की तो कहा गया कि इनका चयन हो गया है और उनका इलाज कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मार्च से कोरोना का प्रभाव बिहार में दिखा और हमलोगों ने लोगों के बचाव और रक्षा के लिये एक-एक काम किये। इसके लिये केन्द्र सरकार से भी सहायता मिली। राज्य सरकार द्वारा 10 हजार करोड़ रूपये से भी ज्यादा उनके इलाज और बचाव के लिये खर्च किये गये। केन्द्र सरकार के सहयोग के अलावा भी राज्य सरकार की ओर से बहुत कुछ किये गये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने तो कोरोना के पहले दौर से ही कोरोना से मृत लोगों के परिजनों को 4 लाख रूपये देने का प्रावधान किया है। हम ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं करते हैं, हम काम में भरोसा रखते हैं। कल भी एक व्यक्ति आये उनकी पत्नी का दिल्ली में कोरोना से निधन हो गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें मुआवजा नहीं मिला है, हमने कहा कि बिहार के रहने वालों की अगर बिहार के बाहर भी कोरोना से मृत्यु होती है तो उन्हें भी चार लाख रूपये का मुआवजा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि 18 से 45 आयु वर्ग के लोगों के लिए टीके की व्यवस्था राज्यों को करनी थी, इसके लिए हमलोगों ने 150 करोड़ रूपये से भी ज्यादा खर्च कर इस काम को शुरु किया। बाद में केंद्र सरकार के द्वारा सभी आयु वर्ग के लिए मुफ्त टीके की व्यवस्था की गई, इसके लिए प्रधानमंत्री जी को विशेष तौर पर बधाई देते हैं। अभी 12 वर्ष से 18 आयु वर्ग के बच्चों के टीके की बात चल रही है अगर उस पर भी निर्णय हुआ तो हमलोग काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य भी राज्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। हमलोगों ने लक्ष्य रखा है कि 6 महीने में 6 करोड़ लोगों का कम से कम टीकाकरण करवायेंगे, जो इस वर्ष के अंत तक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के साथ समीक्षा कर एक-एक चीज की जानकारी ली जाती है। कोरोना की गांव-शहर, हर जगह जच की जा रही है। हमारी इच्छा है कि दो लाख से भी ज्यादा कोरोना जाॅच प्रतिदिन हो। जांच करने का उद्देश्य है कि कोरोना संक्रमितों का पता चल सके, जिससे कोरोना के फैलाव को रोका जा सके और संक्रमितों का इलाज हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरे चरण की रोकथाम के लिये भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। दवा की भी किसी प्रकार की कमी नहीं है। हमने कई जगह जाकर देखा कि लोग मास्क पहन रहे हैं या नहीं। लोग मास्क पहनने में लापरवाही बरत रहे हैं। हमने लोगों को समझाने के लिये और प्रचार-प्रसार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि आज के इस कार्यक्रम में कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है, मुझे उम्मीद है कि इसी महीने में बाकी बचे हुये काम भी आपलोग प्रारंभ कर देंगे। स्वास्थ्य विभाग बेहतर तरीके से काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की संभावना बतायी जा रही है, इसे देखते हुए सभी लोग सचेत और जागरुक रहें। सभी लोग टीकाकरण कराएं, कोई भी छूटे नहीं। लोग मास्क जरुर पहनें, आपस में दूरी बनाकर रहें और हाथ को साफ-सुथरा रखें। बिना जरुरत कहीं बाहर नहीं निकलें।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री का स्वागत स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जश्न-ए-टीका पोर्टल, ई-संजीवनी ओ0पी0डी0 ऐप की शुरूआत की। कार्यक्रम के दौरान दीदी की रसोई, बाल हृदय योजना पर एवं स्क्रैप से मुक्ति योजना पर आधारित अलग-अलग लघु वृतचित्र दिखाया गया।
अपर कार्यपालक निदेशक राज्य स्वास्थ्य समिति अनिमेष कुमार पराशर ने टीकाकरण की प्रगति तथा विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग अरविंदर सिंह ने आयुष चिकित्सा पर आधारित जानकारी दी।
सभी ए0एन0एम0 को चिकित्सकीय उपकरणों/सामग्रियों का एक किट एवं आशा कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान सांकेतिक रुप से मुख्यमंत्री ने ए0एन0एम0 श्रीमती मनीषा कुमारी को किट प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने जी0एन0एम0 श्रीमती सुमन सीखा को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने बेहतर टीकाकरण कार्य के लिये पटना के जिलाधिकारी डाॅ0 चन्द्रोखर सिंह, मोतिहारी के जिलाधिकारी श्री शीर्षत कपिल आोक एवं दरभंगा के जिलाधिकारी श्री एस0एम0 त्याग राजन को ‘सर्टिफिकेट आॅफ एप्रीसिएान’ प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के कंट्री हेड हरि मेनन और बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी सहयोग हेतु एकरारनामे पर हस्ताक्षर किया गया।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी एवं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्अरविंद कुमार चैधरी, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सह जीविका के कार्यपालक निदेशक बाला मुरुगन डी, अपर सचिव स्वास्थ्य कौशल किशोर, बी0एम0एस0आई0सी0एल0 के प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार झा, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के पश्चात् जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर पत्रकारों द्वारा किए गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून अपनी जगह है, अगर कोई राज्य इसको लेकर कानून बनाना चाहे तो यह उसका अधिकार है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर शुरु से ही हमलोगों ने बिहार में अध्ययन और आकलन किया है। आकलन में यह बात सामने आयी है कि पति पत्नी में अगर पत्नी पढ़ी-लिखी है तो प्रजनन दर कम है। पहले बिहार का प्रजनन दर 4 प्रतिशत से भी ज्यादा था जो अब घटकर 3 प्रतिशत से भी कम हो गया है। अगले 5-7 साल के अंदर बिहार का प्रजनन दर 2 प्रतिशत तक पहुंच जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अगर कोई व्यक्ति अपनी बातों को सामने रखता है तो इससे मुझे कोई मतलब नहीं है, हमलोग अपना काम बता सकते हैं। दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक को लेकर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
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