कोरोना संकट में प्राइवेट डॉक्टरों के रवैये पर उठे सवाल। सांसद आरके सिन्हा ने प्राइवेट डॉक्टरों कटघरे खड़ा किया

पटना ( द न्यूज़)। भाजपा के वरीय नेता एवं राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने कोरोना महामारी से हुए आपात स्थिति में प्राइवेट डॉक्टरों और उनके क्लिनिक की नदारदी पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज सब सारी दुनिया के डॉक्टर,स्टाफ वग़ैरह कोरोना जैसे खतरनाक वायरस से लड़ रहे है ,ऐसे समय मे सब प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर कहाँ गायब है? क्या उन्हे ऐसे समय मे गायब होना चाहिये? क्या उन्हे भी लॉकडाउन के चलते अपने क्लिनिक को बन्द करने के आदेश मिले है? आज ऐसे समय मे जब सबसे ज्यादा जरूरत डॉक्टरों की है और ये निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर जो लोकप्रिय और कमाऊ है वे मैदान छोडकर कही निकल गए है इसका मतलब तो यही है कि संकट के इस समय मे काम आने वाले जिन्हे सबसे बदनाम भी किया जाता है वही सरकारी डॉक्टर है।जो कमाऊ नही बल्कि अपने कर्म मे विश्वास रखकर देश की सेवा मे जुटे है।श्री सिन्हा ने कहा कि प्राइवेट डॉक्टरों की नदारद होने की स्थिति देश के लिये चिंता का विषय है क्यूंकि कई ऐसी बिमारियों को टाला नही जा सकता है चाहे डेलीवरी हो,डायलिसिस हो ,और आजकल ब्रेन हैमरैज की शिकयात तेजी से आ रही है या अन्य। अगर समय रहते इन्हे डॉक्टर की चिकित्सा नही मिली तो यह जानलेवा भी हो सकती है।अत: ऐसे समय मे अगर प्राइवेट डॉक्टर सहयोग नही करेंगे तो वे निश्चीत ही उन रोगियो के लिये भगवान कम यमराज बनेगे । उन्होने कहा कि एक तरफ आज जहा भारत का हर नागरिक लॉकडाउन का अनुपालन कर घरों मे रहकर न सिर्फ अपने को बचा रहा है बल्कि संक्रमण न फैला कर दूसरो को भी बचा रहा है वही दुसरी तरफ प्राइवेट डॉक्टरों अपने कर्तव्यो को छोड़कर घरों मे दुबक कर बैठे है जो चिंताजनक है इसलिये मेरा आग्रह है कि इस मुश्किल घड़ी मे देश का प्रत्येक नागरिको कि यह जिम्मेवारी है कि वह स्वतः संज्ञान मे लेकर अपने कर्तव्यो का निर्वहन कर इस मुश्किल घड़ी मे राष्ट्र के काम आ सके। आम जनता भी कह रही है कि जब देश सेवा की बारी आई तो ये निजी डॉक्टर मांद में छिप गए। किसी निजी डॉक्टर द्वारा बड़े राहत की घोषणा नहीं की गई है।

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